डॉ. व्ही. एस. वाकणकर

सरस्वती शोध अभियान का अंतिम निष्कर्ष

  1. हिमालय की वादियों से आकर आदि बद्री के पास मैदानी प्रदेश में बहने लगी । वहाँ उसकी चौडाई ६ – ८ किलो मीटर थी । The Vedic Saraswati River flowed into plains from Himalayas at Adi Badri. Here her width was 6 to 8 kilometers.
  2. फिर काठगढ से वह पश्चिम की ओर मुडी और थानेश्वर, कुरुक्षेत्र, पोहावा, सिरसी, हंसी अग्रोहा, हनुमानगढ, कालीबंगा अनूपगढ और सुरतगढहोते हुए ।
  3. सिंध प्रान्त से दक्षिण की ओर मुढी और कच्छ के रण में समाप्त हुई ।
  4. वैदिक साहित्य जिन आश्रमों, राजाओं, जनजातियों, और कुलों का ल्लेख है वे सब हड़प्पा कालीन ही हैं ।
  5. हडप्पा संस्कृति वेदिक संस्कृति से संबद्ध है ।
  6. सिंधु नदी के किनारे पर जितली बस्तियाँ बसी ससे कितनी ही अधिक बस्तियाँ वेदिक सरस्वती के तड पर बसी है थी। इसलिए इसे सिंधु घाटी सभ्यता कने की अपेक्षा सारस्वत सभ्यता कहना अधिक उचित होगा ।
  7. बीकानेर से पंचभद्राविभाग गोल कंकड मिलते हैं जो २ करोड वर्ष पुराने हैं. वे यह संकेत देते हैं कि बहुत विशाल मात्रा मे बहुत तेज वहाव यहाँ से गुजरा होगा ।
  8. नदी का बहाव बदलने के कारण बाबारमेड और बलोत्रा विभाग में में पुरातन तहें दिखती हैं ।
  9. टीम को गोगा क्षेत्र में बहुत गहराई में मुलतानी मिट्टी की परतों के नीचे मछलियोंके तथा अन्य जलचर प्राणियों के फॉसिल्स मिले हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि यहाँ कभ समुद्र जरूर होगा ।
  10. अभियान की समाप्ति सोमनाथ में हुई जो एक हड़प्पा कालीन स्थान है ।

प्राप्त तथ्यों के आधारपरहम कह सकते हैं कि सरस्वती नदी अन्य नदियों की अपेक्षा बहुत चौडी नदी थी । प्राक्-हड़प्पा और हड़प्पा स्थान सरस्वती नदी के तटवर्ती विभाग में संख्या के आधार पर सिंधु नदी की अपेक्षा बहुत अधिक हैं ।हमें अपनी संस्कृति को “ सिंधुघाटी सभ्यता “ नहीं बल्कि “ सरस्वती सभ्यता ” कहा जाना चाहिए ।

संदर्भ :

  1. The lost courses of the Saraswati River in the Great Indian Desert. New evidence from Landsat imagery. - Bimal Ghosh, AmalKar and Zahid Hussein. (central Arid Zone Research Institute Jodhpur) - The Geographical Journal, Vol 145; No 3 (Nov 1979) 446-51.
  2. Dr. S. M. Rao and Dr. K. M. Kulkarni

Possible contribution of River Saraswati in ground water aquifier systems in western Rajasthan India. – D. S. Mitra and Balaram Babu; Current science, Vol 102, No 5 (March 2012)

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