डॉ. व्ही. एस. वाकणकर

डॉ. व्ही. एस. वाकणकर का परिचय

Padmashree Dr. V. S. Wakankar उज्जैन का वाकणकर परिवार बहुत मशहूर है, उल्लेखनीय और आदरणीय है । उनका सन १७०० से आठ पीढियोका इतिहास है । हालाँकि आर्थिक दृष्टीसे बहुत अच्छे न हों पर परिवार के सारे सदस्य समाज से बहुत नज़दीकी से जुडे हैं और पक्के राष्ट्रप्रेमी हैं । इस परिवार की एक खासियत है, आज की तारीख में भी है – परिवार के कतिपय सदस्य अपनी शैक्षणिक धारा से हटकर दूसरे ही क्षेत्र मे प्राविण्य प्रप्त करते हैं । स्वर्गीय पद्म श्री विष्णु श्रीधर वाकणकरने शिक्षण ग्रहण किया था कला क्षेत्र में और दुनया में प्रसिद्धहुए अपने इतिहास प्राक् ऐतिहासिक और पुरातत्व के योगदान के लिए ।

उनके बडे भाई स्व. लक्ष्मण श्रीधर वाकणकरजी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनिअरिंग की उपाधि प्राप्त की थी । उन्होंने मृच्छिल्प – कला (ceramic art) में निपुणता हासिल की और बादमें देवनागरी लिपी को कम्प्यूटर के लिए अंकबद्ध किया ।

यह साइट भी उनके ही बाल-परिजनोंने बनायी है और वे भी इस क्षेत्र से जुडे हुए नहीं हैं, पर दिग्गजोंसे प्रेरित होकर उन्होनें सिर्फ महसूस ही नहीं किया बल्कि इस महान कार्य को दुनियाके सामने प्रस्तुत करना अपना सामाजिक उत्तरदायित्व समझा ।

इस साइट की विषयवस्तु को लिखने में कतिपय संदर्भों तथा वार्तालापों का आधार लेना पडा । कई टेक्निकल कमियाँ या समझनेमें त्रुटियाँ रही होंगी पर हमने बहुत निष्पक्ष रीतीसे खुले दिमाग से, पाठकों की विचार प्रणाली पर दबाव डालने के हेतु विना, प्रस्तुत करनेकी कोशिश की है ।

यदि पाठक उत्तेजित होकर इन भेत्रों में अधिक रुचि लेकर इन क्षेत्रों में अन्य स्थानों से और ज्ञान प्राप्त कर इस क्षेत्र में अपना सफर करें तो हमें अधिक आनंद होगा ।

अन्य क्षेत्रों की तरह यहाँ भी पाठकों के अपने अपने विचार और प्रतिविचार होंगे. हम दोनों का आदर करते हैं ।

यहाँ उन सभी परिजनों के अर्थात यशोवर्धन सोवले, सुभाष वाकणकर, यश काणे, और अन्य के हम ऋणी हैं जिन्होंने इन पृष्ठो को विकसित करनेमें सक्रीय योगदान किया ।

वाकणकर परिवार के समस्त हितचिंतकों, भूतपूर्व विद्यार्थियों, मित्रों और विशेषज्ञोंको उनकी कई दशकों से दी हुई अपरिमित मदद के लिए और इस साइट के लिए जो क़ीमती डेटा उपलब्ध कराने के लिए लाखो धन्यवाद । उसी तरह डॉ. जे एन दुबेजी तथा डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित का उनके अथक प्रयासोंसे मुद्राओं के संग्रहों को लेखाबद्ध करने के लिए, श्री. ओमप्रकाश शर्माजी को उज्जैन में प्राचीन वस्तुओंका रेकॉर्ड तैयार करने तथा उसका रखरखाव करने के लिए अनेकानेक भन्यवाद.

मैं उन सदस्यों को भी बहुत धन्यवाद देता हूँ जिन्हों ने इस साइट को बनाने हेतु आर्थिक सहायता दी ।

- डॉ. दिलीप मधुसूदन वाकणकर

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