९ मई २०१० हम में से कुछ ने वाकणकर, कऱ्हाडे ब्राह्मण का कुल-सम्मेलन पाली जिला सिंहदुर्ग महाराष्ट् में आयोजित किया था । यह सम्मेलन अपने आप में बहुत ही यशस्वी रहा ।.१०० से अधिक वाकणकर परिवारके तथा नजदीकी संबंधी थे ।

चर्चासत्रों के दरमियान यह और जानकारी सामने आयी की वाकणकर की भारत में ३-४ शाखाएँ हैं ।

  • कोकण शाखा
  • पुणे शाखा
  • बडोदा शाखा
  • धार शाखा

बहुत वाकणकर अत्री गोत्र के हैं । वहाँ पर भारद्वाज गोत्र के वाकणकर बी आये थे.। यह तो एक गर्व की बात है सभी शाखाओं में कितनेही सदस्य किसी न किसी क्षेत्र में बहुत ऊँचाई पर पहुँचे हैं और ख्यातनाम बने हैं

Wakankars @Dhar/Ujjain

यह वेबसाइट धार-उज्जैन मध्यप्रदेश शाखा के अत्री गोत्रीय वाकणकर को समर्पित है । अर्चनानस् और शाणस्व ऋषी के वंशज. वाणकर के घरों में रोज जो प्रातःअभिवादन होता है उसमें यह स्पष्ट उल्लेख है

त्रि-प्रवरान्वितअत्रिगोत्पन्नोहं, ऋग्वेदांर्तगतआश्वलायनशाक लशाखाध्यायीन…..
-नामशर्माऽहं भोगुरो त्वाम अभिवादयामि

परिवार विवरण (पंचातयतन)

  1. श्री जगदंबा महालक्ष्मी ( कोल्हापूर )
  2. श्री महाकाली
  3. श्री महासरस्वती
  4. श्री सीता
  5. श्री रामचन्द्र

वाकणकर मूलतः वाकण जिला रत्नागिरी, कोकण महाराष्ट्र तहसील राजापूर. नागोठणे के पास)

अंदाज़न सात पीढियों पहले वे कोकण से पुणे आये फिर वहाँ से वडोदरा और अंत में धार. अनंत वामन वाकणकर को परिवार के इतिहास के बारेमें कुछ लिखने की आदत थी.। श्री. लक्ष्मण श्रीधर वाकणकर ने अपने ७५ वे जन्मदिन पर वाकणकर कुल परिचय नामक छोटीसी पुस्तिका मालाड में प्रसिद्ध की थी ।

इस से परिवार के वंशवृक्ष के साथ गत ३०० वर्षो की कालावधि में परिवार की और व्यक्तिगत महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है ।

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